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अथ अन्नप्राशन संस्कार

अथ अन्नप्राशन संस्कार

बालक को छठे , सातवें , आठवें महिने में किसी शुभ दिन यह संस्कार कराते है ।

संङ्कल्प करके गणपति पूजन करें । स्थंडिल का पंचभूसंस्कार करके अग्नि स्थापन करें । ब्रह्मा प्रणिता प्रोक्षणी का स्थापन करें । हवन प्रारम्भ करें ।

( मनसा ) ॐ प्रजापतये स्वाहा । इदं प्रजापते न मम ॥ ॐ इन्द्राय स्वाहा । इदं इन्द्राय न मम । ॐ अग्नये स्वाहा । इदमग्नये न मम । ॐ सोमाय स्वाहा । इदं सोमाय न मम ।

अग्नि का पूजन करें- “ ॐ शुचिनाम्ने वैश्वानराय नमः “ खीर की आहुतियाँ प्रदान करें । यथा –

ॐ देवीं वाचमजनयन्त देवास्तां विश्वरूपाः पशवो वदन्ति । सानोमंद्रेष मूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु स्वाहा ॥१ ॥ इदं वाचे न मम ।

ॐ देवीं वाचमजनयन्त देवास्तां विश्वरूपाः पशवो वदन्ति । सानोमंद्रेष मूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु इदं वाचेन मम स्वाहा ॥२ ॥

ॐ वाजोनो अद्य प्रसुवातिदानं वाजोदेवाँर ऋतुभिः कल्पयाति । वाजोहिमासर्व वीरं जजान विश्वा आशा वाजपतिर्जयेय ग्गुँ स्वाहा ॥३ ॥ इदं देव्यै वाचे वाजाय न मम ॥

पुनः स्थालीपाक ( खीर ) की चार आहुतियाँ देवें ।

ॐ प्राणेनान्नमशीय स्वाहा । इदं प्राणाय न मम ॥१ ॥ ॐ अपानेन गंधानशीय स्वाहा । इदमपानाय न मम ॥२ ॥ ॐ चक्षुषा रूपाण्यशीय स्वाहा । इदं चक्षुषे न मम ॥३ ॥ ॐ श्रोत्रेण यशोशीय स्वाहा । इदं श्रोत्राय न मम ॥४ ॥

गायत्री की आहुति देकर स्विष्टकृत होम करें ।

ॐ अग्नये स्विष्टकृते स्वाहा । इदमग्नये स्विष्टकृते न मम ॥ॐ भूः स्वाहा ।इदमग्नये न मम ॥१॥ ॐ भुवः स्वाहाः इदं वायवे न मम ॥२ ॥ ॐ स्वः स्वाहा । इदं सूर्याय न मम ॥३ ॥ ॐ त्वन्नो अग्ने ० स्वाहा । इदमग्नी वरुणाभ्यां न मम ।।४ ॥ ॐ ॐ सत्वग्नो अग्ने ० स्वाहा । इदमग्री वरुणाभ्यां न मम ॥५ ॥ ॐ अयाश्चाग्ने …….. स्वाहा । इदमग्नये अयसे न मम ॥६॥ ॐ ये ते शतं …… स्वाहा । इदं वरुणाय सवित्रे विष्णवे विश्वेभ्यो देवेभ्यो मरुद्भयः स्वर्केभ्यश्च न मम ॥७॥ ॐ उदुत्तमं वरुण …… स्वाहा । इदं वरुणादित्यायादितये न मम ॥८ ॥ ॐ प्रजापतये स्वाहा । इदं प्रजापतये न मम ॥९ ॥

संस्रवप्राशन कराकर होम समापन करायें । बालक को खीर खिलावे तथा तैल , कटु कषाय , मधुराम्ल सर्वान्न को एक काँस्यपात्र में एकीकृत करें और ” ॐ हंत ” इस मंत्र से प्राशन कराये ।

इसके बाद बालक के सामने कपड़े वस्त्र , खिलौने , पुस्तक इत्यादि कई वस्तुएँ रखें जिस पर प्रथम बार हाथ रखें वही बालक की आजीविका समझना चाहिए ।

॥इति अन्नप्राशन संस्कार प्रयोग :॥