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अथ गोमुखप्रसव विधानम्

अथ गोमुखप्रसव विधानम्

रेवती , अश्विनी , अश्लेषा , मघा , चित्रा , ज्येष्ठा मूल नक्षत्र में वैधृति व्यतिपातादियोग , ग्रहण योग , ज्वालामुखी योग , सिनीवाली व कुहू में शान्ति हेतु गोमुखप्रसव विधान करना चाहिये ।

॥ उपयुक्त समय ॥

जन्मर्क्षे वा त्रिजन्मर्क्षे शुभेवारे शुभेदिने । कृत्वाभ्यंगादिकं सर्वं गृहालंकार पूर्वकम् ॥

अर्थात् गोमुखप्रसव विधान जन्म नक्षत्र या जन्म के नक्षत्र से तीसरे नक्षत्र में शुभवार या शुभ दिन में यह कार्य करें ।

॥ लौकिक विशेष ॥

लोकाचार में प्रसूतिस्नान व गंडान्त शान्ति विधान एक ही दिन करते है इसलिये नांवण की पूजा व हवन कार्य दो कर्म होते है । गोमुखप्रसव भी इस समय होना जरुरी है अत : कई आचार्य गोमुखप्रसव की आहुतियों का अर्थ हवन विधान से समझते है अतः अधिदेवता प्रत्यधिदेवताओं की आहुतियों सहित संपूर्ण हवन विधान करा देते है एवं बाद में गोमुखप्रसव हेतु तीन सरकण्डों से या मोली से योनि आकार ( त्रिभुजाकार ) बनाकर उसमें से ३ बार बालक को निकाल कर शुद्ध करते है एवं फिर नांवण कराते है ।

परन्तु विशेष – जब तक सूतिका द्वारा सूर्य पूजन ( नांवण ) नहीं होगा तब तक अशौच निवारण नहीं होगा तो अधिदेवता व प्रधान देवताओं की आहुति कैसे लगेगी ? अतः पहले नांवण कराना चाहिये , गोमुखप्रसव हेतु एक छोटी वेदी अलग बनानी चाहिए । गोमुखप्रसव व नांवण के बाद ही मूलादि शांति हेतु हवन का अधिकार प्राप्त होगा ।

औरतों के लिये समस्या यह है कि पीहर वालों से कपड़े हवन के समय लेवें तो नांवण पर से प्रसूता खाली नहीं उठनी चाहिए । इस कारण पण्डित हवन पहले एवं नांवण बाद में कराते है ।

स्वमतेन् – वैसे आचार्य को लोकाचार एवं शास्त्रोक्त विधान दोनों को अपनाना पड़ता है । लोकाचार का विशेष ध्यान रखना पड़ता है । यह ध्यान रखने की बात है कि “ गोमुखप्रसव में आहुतियाँ मधु , दधि एवं आज्य की लगती है , तिलादि होम की नहीं ” अत : इसे शान्ति होम नहीं समझे ।

प्रसूता एवं यजमान द्वारा प्रारंभ में गोमुखप्रसव तक का विधान करा लेवें । बाद में प्रसूता से सूर्य पूजा करायें छोटी वेदी पर या किसी हवन पात्र में गौमुखप्रसव हेतु दही , शहद व आज्य से विष्णु , वरुण एवं यक्ष्मणे की आहुतियाँ देकर नामकरण संस्कार की तरह नांवण का विधान पूरा करायें ।

नांवण समय घर की किसी स्त्री द्वारा कोई वस्त्र ओढ़ा देवें । पश्चात् जेष्ठा मूलादि की शान्ति हेतु प्रधान मण्डल बनाकर तिलादि से शान्ति होम करें इस समय पीहर के वस्त्रादि प्रसूता को दिलावें ।