
अथ व्यतीपातशांति प्रयोग
गोमुख प्रसव शांति कर्म करके व्यतीपात शांति विधान करें ।
संकल्प – अद्येत्यादि अस्य शिशोः व्यतिपात जनन सूचित सर्वारिष्ट शांति द्वारा श्री परमेश्वर प्रीत्यर्थं व्यतीपात जनन शान्तिं करिष्ये ।
गणेश पूजन , अग्नि स्थापन , ग्रह पूजन करें । अग्निवेदी के पूर्व में भद्र पीठ पर कलश स्थापन करे उस पर सूर्य की मूर्ति स्थापित करें ।
‘ आकृष्णेन ‘ मंत्र से आवाहन पूजन करें ।
सूर्य के दाहिनी और ‘ नमस्ते रुद्र मन्यव ‘ से रुद्र का आवाहन एवं बाँयी ओर ‘ ॐ अग्निदूतं पुरोदधे ‘ मंत्र से अग्नि का आवाहन पूजन करें ।
विप्र कलश का स्पर्श करे । ‘ विभ्राट ‘ सूर्यसूक्त , अग्निसूक्त , रुद्रसूक्त , तथा त्र्यम्बकं मंत्र का पाठ व जप करें ।
पूजा होम अनन्तर खीर व घी से सूर्य की १००८ या १०८ आहुति , रुद्र एव अग्नि की २८-२८ आहुति देकर लक्ष्मी होमादिक कर्म करके यज्ञ समापन करें ।
॥ इति व्यतीपातजनन शांति प्रयोगः ॥
