
सूर्य तान्त्रिक मंत्रा
द्वयक्षर मार्तण्ड भैरव मंत्र : –ठ्रिं ह्रयूँ।
हिन्दी तंत्रसार में ह्रयो ॐ लिखा है तथा शारदा तिलक में ह्रयूँ बताया है ।
पुरश्चरण बाद- शालि , घृत , तिल , विल्व से एक लक्ष होम करें । राजवृक्ष के होम से शत्रुनाश तथा जपाकुसुम के होम से वशीकरण , मातुलिङ्ग ( बिजौरा ) के होम से धन प्राप्ति होवे ।
अन्य मंत्र – रां हुं
इस मंत्र के ऋषि अज । छन्द गायत्री । देवता भानु है ।
त्र्यक्षर मंत्र- ह्रां ह्रीं सः ।
इसके ऋषि अज , गायत्री छन्द , देवता सविता है ।
ध्यानम्– स्थितः पद्मेऽरुणे त्र्यक्षोऽरुण – वर्ण सुभूषणः । पद्मद्वय वराभीति हस्तश्चारुण – सेवितः ॥
अन्य मन्त्र : – ह्रीं हंसः
इस मंत्र की उपासना से धन प्राप्ति , लाभ होवे ।
चतुरक्षर मंत्र- ॐ ह्रीं हंसः ।
मेरुतंत्र के अनुसार ऋषि ब्रह्मा , छन्द गायत्री , देवता सूर्य है ।
देदीप्यमान – रत्नौघ – मुकुट विराजितम् । पाशांकुश वराभीतिकरं रक्तं भजे रविम् ॥
मंत्र रत्न मंजूषा में इसके ऋषि अज , छन्द गायत्री , देवता सूर्यरूपिणी भुवनाधीशा कहा है ।
ध्यानम् भास्वद्रत्नौघमौलिं स्फुरदमृत रुचो रञ्जयच्चारुरेखाम् । सद्यः संतप्तकार्तस्वर कमल जपाभासुरभिः प्रभाभिः ॥ विश्वाकाशावकाशं ज्वलदतिरुचिरं धर्तृ – पाशांकुशेष्टा भीतानां भङ्गि – तुङ्गस्तनमवतु जगन्मातुरार्कं वपुर्नः ॥
षडंगन्यासः- ॐ ह्रां हृदयाय नमः । ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा । ॐ ह्रूं शिखायै वषट् । ॐ हैं कवचाय हुम् । ॐ ह्रौं नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ ह्रः अस्त्राय फट् ।
चार लक्ष जप कर , ब्रह्मवृक्ष की समिधा , कमल पुष्प तथा त्रिमधु से होम करने से अतुल धन प्राप्ति तथा पुत्र पौत्रादि की वृद्धि होवे ।
षडक्षर मंत्र : – हं खः खः खोल्काय ।
इसके ऋषि ब्रह्मा । छन्द गायत्री । देवता सवितृ है ।
षडन्यासः- खां , खीं , खूं , खैं , खौं , खः से अंगन्यास करें ।
रक्तपा द्वयं हस्तैर्बिभ्रतं च वराभये । बन्धूकाभं त्रिनेत्रं च रविं ध्यायेत् सुभूषितम् ॥
एक लक्ष जप करके पलाश या उदुम्बर समिधा से त्रिमधु युक्त बिल्व होम करें ।
अष्टाक्षर मंत्र : – ॐ घृणिः सूर्य आदित्य ।
मंत्र रत्नमंजूषा के अनुसार इसके भार्गव ऋषि है । शारदा तिलक के अनुसार देव – नाग है । शारदा तिलक की टीका में ” रं “ इसका बीज , तथा ऊँ शक्ति बताया है ।
अन्यच्च- ॐ घृणि सूर्याय नमः ।
