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सिद्ध सूर्य यंत्रम्

सिद्ध सूर्य यंत्रम्

यंत्र महात्म्य- यह चमत्कारी सूर्य यंत्र मनुष्य के समस्त कार्यों को सिद्ध करता है । इस यंत्र के प्रभाव से भगवान् सूर्यनारायण की कृपा प्राप्त होती है । इस यंत्र को धारण करने से खाँसी , दमा , गर्मी , कुष्ठरोग त्वचा व नेत्ररोग नष्ट होते है ।

यंत्र निर्माण की विधि इस प्रकार है

गुरु – शुक्रास्त , मलमास एवं गुर्वादित्यादि ( सूर्य – बृहस्पति जब एक राशिस्थ हो ऐसे ) निषिद्ध समय को छोड़कर शुद्ध दिनों में किसी भी महिने के शुक्ल पक्ष में रविवार को जिस दिन कृत्तिका नक्षत्र हो , उस दिन रविकृत्तिका योग में अथवा उत्तराफाल्गुनी , उत्तराषाढा , पुष्य नक्षत्र में आक के दूध , केसर , गोरोचन और आक के पत्तों के रस से मसी ( स्याही ) बनाकर आक की कलम से इस यंत्र को भोजपत्र पर लिखकर “ ॐ ह्रीं हंसः घृणिः सूर्याय नमः “ इस सूर्य मंत्र से १०८ बार अभिमंत्रित कर सुवर्ण के ताबीज में रखकर दक्षिण भुजा में धारण करने से मनुष्य के सब कार्य सिद्ध होते है ( साधारण मनुष्य ताँबे के ताबीज में धारण कर सकते है )

किसी भी महिने के शुक्लपक्ष में रविवार के दिन जब पुष्य , कृत्तिका , उत्तराफाल्गुनी अथवा उत्तराषाढा नक्षत्र रहे तब धारण करने से सूर्य का अनिष्ट फल शमन होता है एवं मनुष्य का तेज बढ़ता है ।

यन्त्रम्