गणपति उपासना के मन्त्र Mantras Of Ganapati Worship

गणपति उपासना के मन्त्र Mantras Of Ganapati Worship
महागणपति की उपासना सभी प्रकार के मन्त्रों का जप करने से पूर्व सामान्य रूप से तथा इष्टसिद्धि , विघ्ननाश , द्रव्य प्राप्ति आदि के लिए अत्यन्त उपयोगी मानी गई है ।
शास्त्रों में गणपति का सूक्ष्म रूप ॐकार को ही माना गया है और गणपति का सूक्ष्म यज्ञात्मक रूप स्वस्तिक को बतलाया है ।
मन्त्रों में गणपति के बीज मन्त्र हैं ‘ गं ‘ और ‘ ग्लौं ‘ – इन बीज मन्त्रों में ॐ जोड़कर , अथवा ॐ ह्रीं जोड़कर , गणपतये नमः अन्त में लगाकर जप करने का विधान है ।
अन्य मन्त्र इस प्रकार हैं ( १ ) ॐ वक्रतुण्डाय हुं । एक लक्ष जपकर पुरश्चरणपूर्ति करें ।
( २ ) गणपति नवार्ण ( उच्छिष्ट गणपति ) मन्त्र ॐ गं हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा । सवा लाख जप करें ।
( ३ ) शक्तिविनायक मन्त्र – ॐ ह्रीँ ग्रीँ ह्रीँ ।
( ४ ) सर्वकामना – सिद्धि मन्त्र – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा अथवा – ॐ नमः उच्छिष्टगणेशाय हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा ।
( ५ ) लक्ष्मीगणेश मन्त्र – ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ।
( ६ ) त्रैलोक्यमोहन गणेश मन्त्र – ॐ वक्रतुण्डायैकदंष्ट्राय क्लीं ‘ ह्रीं श्रीं गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ।
( ७ ) हरिद्रागणपति मन्त्र – हुँ गं ग्लौं हरिद्रागणपतये वर वरद सर्वजनहृदयं स्तम्भय स्तम्भय स्वाहा ।
( ८ ) गणपति – गायत्री – ॐ एकदंष्ट्राय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ।
( 9 ) क्षिप्रगणपति मन्त्र – ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं गणपतये सर्वकार्यसिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।
( १० ) एकाक्षरी गणपति मन्त्र – ॐ गं ॐ ।
( ११ ) गणेश्वरकल्प मन्त्र ॐगाँ गीँ गूँ गैँ गौँ गः ।
विनियोग – ॐ अस्य श्रीगणपतिमन्त्रस्य गणो नाम ऋषिः विघ्नेश्वरो देवता गं बीजं ॐ शक्तिः श्रीगणपतिप्रसाद सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः । मूल मन्त्र के एक – एक अक्षर से करन्यास और अंगन्यास करें । बाद में गणपति की पूजा करके प्रतिदिन निश्चित जप करें । हवन में’ ॐ गणपतये स्वाहा ‘ – मन्त्र बोलते हुए घी और गूगल का प्रयोग करें । सात लाख मन्त्र जप और दशांश हवनादि से गणपति प्रसन्न होकर साधक को यथेच्छ वरदान देते हैं ।
गणपति के अन्य मन्त्रों की आराधना में विनियोग , ऋषिन्यास , करन्यास , हृदयादिन्यास और ध्यान इस प्रकार करें ।
विनियोग – ॐ अस्य श्रीगणपतिमन्त्रस्य गणकऋषिः निचृद् गायत्रीछन्दः श्रीगणपतिर्देवता गणपतिप्रसाद – सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ।
न्यास – ॐ गणकऋषये नमः – शिरसि ( मस्तक का तत्त्वमुद्रा से स्पर्श करें ) । ॐ निचृद्गायत्रीछन्दसे नमो मुखे— ( मुख का स्पर्श करें ) । ॐ श्रीगणपतिदेवतायै नमो हृदये— ( हृदय का स्पर्श करें ) । ॐ विनियोगाय नमः करसम्पुटे- ( दोनों हथेलियों के आगे – पीछे स्पर्श करें ) ।
करन्यास – ॐ गाँ अंगुष्ठाभ्यां नमः- ( तर्जनी द्वारा अँगूठे के मूल से अग्रभाग तक स्पर्श करें । ॐ गीं तर्जनीभ्यां नमः — ( अँगूठे से तर्जनी के मूल से अग्रभाग तक स्पर्श करें । ॐ गूँ मध्यमाभ्यां नमः– ( मध्यमा पर पूर्ववत् ) ॐ – अनामिकाभ्यां नमः- ( अनामिका पर पूर्ववत् ) ॐ गौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः– ( कनिष्ठिका पर पूर्ववत् ) ॐ गः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः– ( हथेलियों पर परस्पर स्पर्श करें ) । )
हृदयादिन्यास – ॐ गाँ हृदयाय नमः- ( हृदय का स्पर्श करें ) ॐ गीँ शिरसे स्वाहा– सिर का स्पर्श करें ॐ गूँ शिखायै वषट्– ( शिखा का स्पर्श करें) ॐ गैं कवचाय हुम्– ( दोनों भुजाओं का स्पर्श करें) ॐ गौं नेत्रत्रयाय वौषट्- ( दोनों नेत्र तथा पाखों के बीच के भाग का स्पर्श करें ) ॐ गः अस्त्राय फट् ( ताली बजाएँ ) ।
ध्यान
चतुर्भुजं रक्ततनुं त्रिनेत्रं , पाशाङ कुशौःमोदकपात्रदन्तौ । करैर्दधानं सरसीरूहस्थं गणाधिनाथं शशिचूडमीडे ॥



