महालक्ष्मी उपासना मन्त्र Mantras Of Mahalaxmi Worship

महालक्ष्मी उपासना मन्त्र Mantras Of Mahalaxmi Worship
भगवती महालक्ष्मी की उपासना केवल द्रव्य प्राप्ति के लिए ही नहीं की जाती है । अपितु समस्त देवी उपासनाओं के मूल रूप में भी की जाती है । भारत के विभिन्न प्रान्तों में व्याप्त श्रीविद्या की उपासना भी इसी उपासना का रूप है । इस लिए साधक को चाहिए कि यदि वह द्रव्य की लालसा नहीं रखता हो तब भी महालक्ष्मी की उपासना से विमुख न होवे । भगवती भुवनेश्वरी आदि नाम भी महालक्ष्मी के ही हैं तथा महालक्ष्मा का प्रधान बीजमन्त्र ‘ श्रीँ ‘ है जिसका प्रयोग सर्वत्र किया जाता है ।
लक्ष्मीप्राप्ति के मन्त्र
( १ ) लक्ष्मी गायत्री – ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।
( २ ) ज्येष्ठा लक्ष्मी – ॐ रक्तज्येष्ठायै विद्महे नीलज्येष्ठाय धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ।
अथवा – ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ज्येष्ठलक्ष्मी – स्वयम्भुवे ह्रीँ ज्येष्ठायै नमः ।
( ३ ) महालक्ष्मी मन्त्र –ॐ श्री ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः।इस मन्त्र का कार्तिक मास में सवा लाख जप करें ।
( ४ ) लक्ष्मी मन्त्र – ॐ ह्रीँ श्रीँ महालक्ष्मि सर्वकामप्रदे सर्व सौभाग्यदायिनि अभिमतं प्रयच्छ सर्वसर्वगते सुरूपे सर्वदुर्जयविमोचिनि ह्रीं सः स्वाहा ।
( ५ ) धनदा लक्ष्मी – ॐ नमो धनदायै स्वाहा । इस मन्त्र का एक लाख जप करें ।
( ६ ) लक्ष्मीयक्षिणी – ॐ ऐँ लक्ष्मी श्रीँ कमलधारिणी कलहंसी स्वाहा । लाल कनेर के पुष्पों से लक्ष्मी की पूजा और उन्हीं से दशांश हवन करें ।
( ७ ) पद्मावती विद्या – ॐ ह्रीं पद्मावत्यै नमः ।
( ८ ) लक्ष्मी – लघुप्रयोग – ॐ अस्य श्रीकामबीजमन्त्रस्य विष्णु ऋषिः उष्णिग् छन्दः श्रीमहालक्ष्मीदेवता क्लीं बीजं क्लीं शक्तिः क्लीं कीलकं श्रीमहालक्ष्मीप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
ऋष्यादिन्यास – विष्णुऋषये नमः शिरसि । उष्णिग्छन्दसे नमो मुखे । श्रीमहालक्ष्मीदेवतायै नमो हृदये । क्लीं बीजाय नमो गुह्य । क्लीं शक्तये नमः पादयोः । क्लीं कीलकाय नमो नाभौ । क्लीं विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।
कर एवं हृदयादि न्यास – ॐ क्लीं बीजमन्त्र से करें ।
मूल मन्त्र – ॐ क्लीं नमः – से सारे अंग पर घुमायें तथा दसों ‘ दिशाओं में मन्त्र बोलते हुए नमस्कार करें ।
ध्यान –
अक्षत्रकपरशूगदेषुकुलिशं पद्म धनुः कुण्डिकां , दण्डं शक्तिमसि च चर्मजलजं घण्टां सुराभाजनम् । शूलं पाशमुदर्शने च दधतीं हस्तैः प्रसन्नाननां , सेवे सैरिभमर्दिनीमिह महालक्ष्मी सरोजस्थिताम् ॥ इस प्रकार ध्यान करके मानसपूजापूर्वक जप करें ।
जप मंत्र– ॐ क्लीँ नमः|



